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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: पकड़े गए कर्मचारियों पर गंभीर आरोप, CCTV में दिखीं 70 संदिग्ध घटनाएं

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अयोध्या। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद मंदिर की निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल उठ रहे हैं। मामले में आपराधिक जांच जारी है और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

जांच में चढ़ावे की गिनती से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका, काउंटिंग रूम की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की तलाशी और शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी जैसे कई मुद्दे सामने आए हैं। वहीं, गिरफ्तार आरोपियों के वकील ने अपने मुवक्किलों पर लगाए गए आरोपों को गलत बताया है।

काउंटिंग रूम में चढ़ावे की रकम की होती थी गिनती

राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दानपात्रों में डाली गई नकदी को काउंटिंग रूम में लाया जाता था। यहां नोटों और सिक्कों की छंटाई के बाद बैंक की मशीनों से रकम की गिनती की जाती थी और इसके बाद पैसा बैंक भेजा जाता था। मंदिर में काम कर चुके एक पूर्व कर्मचारी ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि उन्होंने खुद किसी को चोरी करते हुए नहीं देखा, लेकिन उनके कुछ साथियों ने काउंटिंग के दौरान पैसे गायब होने की शिकायत की थी। पूर्व कर्मचारी के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों पर नजर रखी जाने लगी थी। उनका दावा है कि कुछ लोग नोटों को जूतों, जैकेट या कपड़ों में छिपाकर बाहर ले जाते थे।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चोरी रोकने की जिम्मेदारी संभालने वाले कुछ लोग इस मामले को लेकर पर्याप्त गंभीर नहीं थे।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी उठे सवाल

एसआईटी की शुरुआती जांच में सुभाष श्रीवास्तव को मंदिर का गणना प्रभारी बताया गया है। वह उन आठ लोगों में शामिल हैं जिन्हें 26 जून को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों के वकील कुलशेखर सिंह ने इससे अलग दावा किया है। उनके मुताबिक, सुभाष श्रीवास्तव उस हिस्से में मौजूद नहीं रहते थे जहां नोटों और सिक्कों की छंटाई होती थी। वकील का कहना है कि श्रीवास्तव उस कमरे में रहते थे जहां बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में रकम की गिनती की जाती थी।

अयोध्या स्थित राम मंदिर की तस्वीर, जहां चढ़ावे की रकम को लेकर जांच जारी है।

2022 में भी सामने आया था गड़बड़ी का दावा

चढ़ावे की रकम को लेकर सवाल पहले भी उठ चुके हैं। मंदिर में 2021 और 2022 के दौरान काम कर चुके महिपाल सिंह ने दावा किया कि उन्होंने 2022 में करीब 5 लाख रुपये की कथित गड़बड़ी पकड़ी थी। महिपाल सिंह के मुताबिक, दिनभर की गिनती के आधार पर उन्हें लगा कि जमा रकम बताई गई राशि से ज्यादा होनी चाहिए। दोबारा जांच कराने पर कथित तौर पर वाउचर और जमा की जा रही रकम में करीब 5 लाख रुपये का अंतर सामने आया। उनका दावा है कि उन्होंने इस बारे में तत्कालीन वरिष्ठ पदाधिकारियों को जानकारी दी थी।

महिपाल सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बाद कुछ CCTV फुटेज हटाने की कोशिश की गई और उन्हें अगले दिन उस जगह से हटा दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों ने इन्हें गलत बताया है।

शिकायत के बावजूद FIR में देरी क्यों हुई?

मामले की टाइमलाइन भी कई सवाल खड़े करती है। ट्रस्ट से जुड़े लोगों के मुताबिक, जून की शुरुआत में चढ़ावे की रकम को लेकर गड़बड़ी का शक सामने आया था। इसके बाद अंदरूनी स्तर पर जांच शुरू की गई।

13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। इसके बाद 25 जून को FIR दर्ज की गई, जिसमें मंदिर में काम करने वाले आठ लोगों को नामजद किया गया।

अगले ही दिन, 26 जून को सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

एसआईटी की शुरुआती जांच के मुताबिक, एसआईटी के गठन से पहले ही ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा कुछ आरोपियों से करीब 81 लाख रुपये की बरामदगी की जा चुकी थी। ऐसे में सवाल उठा कि जब ट्रस्ट को गड़बड़ी और कथित चोरी का शक हो चुका था और रकम की बरामदगी भी शुरू हो गई थी, तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में इतना समय क्यों लगा?

ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि मामले को छिपाने की कोशिश नहीं की गई और शक होते ही जांच शुरू कर दी गई थी।

CCTV फुटेज में दिखीं 70 संदिग्ध घटनाएं

एसआईटी की शुरुआती जांच में CCTV फुटेज को अहम सबूत माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच टीम 27 अप्रैल से 5 जून के बीच की CCTV फुटेज ही देख सकी। इससे पहले की फुटेज उपलब्ध नहीं थी। इन 39 दिनों की फुटेज में करीब 70 घटनाएं ऐसी मिलीं, जिनमें कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां या खुले नोट कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए दिखाई दिए।

जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपियों के बयानों और उनके बैंक खातों में जमा रकम से संकेत मिलता है कि कथित गड़बड़ी 27 अप्रैल से पहले भी हो सकती है।

हालांकि, पुरानी CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण इससे पहले की अवधि में कितनी रकम की कथित चोरी हुई, इसका स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आया है।

सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव पर भी सवाल

एसआईटी की शुरुआती जांच में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी खामियों का भी जिक्र किया गया है। जांच के मुताबिक, 2024 में बनाए गए कुछ सुरक्षा नियमों को 2025 में कमजोर कर दिया गया था और कर्मचारियों की नियमित तलाशी बंद हो गई थी।

जांच में यह भी कहा गया कि काउंटिंग रूम में काम करने वाले कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं होने से कथित चोरी की घटनाओं को रोकना मुश्किल हुआ। राम मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा निजी सुरक्षा कंपनी SIS के पास था। कंपनी से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, काउंटिंग रूम से बाहर आने वाले कर्मचारियों की तलाशी उनकी जिम्मेदारी में शामिल नहीं थी। मामले के सामने आने के बाद यह जिम्मेदारी उन्हें दिए जाने की बात सामने आई है।

राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज

मामला सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। विपक्षी नेताओं ने मंदिर ट्रस्ट और व्यवस्था पर सवाल उठाए, जबकि बीजेपी नेताओं ने कहा कि अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।

राम मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच पर रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश एसआईटी ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट अदालत में सीलबंद लिफाफे में दाखिल की।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी को मजबूत करने या उसका पुनर्गठन करने का सुझाव दिया। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच कर रही एसआईटी का पुनर्गठन किया।

27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने जांच की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर जोर देते हुए पुनर्गठित एसआईटी में एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया।

राम मंदिर में दर्शन करते श्रद्धालु

अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा सिर्फ कथित तौर पर पैसे निकालने वाले लोगों तक सीमित नहीं है। CCTV फुटेज, सुरक्षा नियमों में बदलाव, कर्मचारियों की तलाशी बंद होना, कथित रकम की बरामदगी और FIR में हुई देरी जैसे कई सवाल जांच का हिस्सा हैं।

फिलहाल जांच जारी है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस पूरे मामले में अंतिम तौर पर कौन-कौन दोषी है और कितनी रकम की चोरी हुई।

जांच पूरी होने और अदालत के सामने तथ्य आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।