UGC Bill Protest 2026: मेरठ में जल सत्याग्रह, नियम वापस लेने की मांग तेज
UGC Bill Protest 2026 के तहत उत्तर प्रदेश के मेरठ में प्रदर्शनकारियों ने गंगनहर में उतरकर जल सत्याग्रह किया। आंदोलन में शामिल संगठनों ने UGC Equity Regulations 2026 को पूरी तरह वापस लेने की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। मांग स्वीकार नहीं होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी भी दी गई है।
UGC Bill Protest 2026 मेरठ के सलावा में जल सत्याग्रह
शनिवार, 29 अगस्त 2026 को मेरठ के सलावा में मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के पास प्रदर्शन आयोजित किया गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) और राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी (सत्य) के नेतृत्व में सैकड़ों लोग गंगनहर के पास एकत्र हुए।
प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर गंगनहर के पानी में उतरे तथा UGC के नए नियमों के खिलाफ नारेबाजी की। जल सत्याग्रह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए मौके पर पुलिस बल तैनात रहा।
बाद में एसडीएम उदित नारायण सेंगर और सीओ आशुतोष कुमार मौके पर पहुंचे। संगठन के पदाधिकारियों ने अधिकारियों से बातचीत करने के बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में UGC Equity Regulations 2026 को वापस लेने की मांग की गई।
प्रदर्शन के दौरान कुछ वक्ताओं ने देश में समान शिक्षा नीति लागू करने और जातिगत आरक्षण व्यवस्था समाप्त करने जैसी अलग मांगें भी उठाईं। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा।
UGC Equity Regulations 2026 का विवाद
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी 2026 को University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 जारी किए थे। इन्हें विरोध-प्रदर्शनों और इंटरनेट पर “UGC Bill” कहा जा रहा है, लेकिन आधिकारिक रूप से ये संसद में पेश हुआ कोई विधेयक नहीं, बल्कि UGC द्वारा जारी किए गए Regulations हैं।
UGC की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ये नियम देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने और समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किए गए थे।
नियमों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के भीतर Equal Opportunity Centre, Equity Committee, Equity Helpline और शिकायतों की जांच के लिए औपचारिक व्यवस्था बनाने जैसे प्रावधान शामिल थे। संस्थानों द्वारा नियमों का पालन नहीं करने पर UGC की ओर से कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया था।
विरोध करने वाले संगठनों की आपत्तियां UGC Bill Protest 2026
नियमों का विरोध करने वाले छात्र और संगठन दावा करते हैं कि इनमें सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को झूठी या गलत शिकायतों से बचाने के लिए स्पष्ट सुरक्षा नहीं दी गई है। उनका आरोप है कि भेदभाव की कुछ परिभाषाएं अस्पष्ट हैं और इनके गलत इस्तेमाल की आशंका बनी रहेगी।
विरोधी संगठनों का यह भी कहना है कि नियम विद्यार्थियों के बीच जाति के आधार पर तनाव बढ़ा सकते हैं। इसी कारण वे नियमों में केवल संशोधन के बजाय इन्हें पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, नियमों का समर्थन करने वाले छात्र संगठनों का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की शिकायतों के समाधान के लिए मजबूत व्यवस्था आवश्यक है। उनके अनुसार SC, ST और OBC विद्यार्थियों को संस्थागत भेदभाव से बचाने के लिए प्रभावी शिकायत तंत्र होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की रोक और मौजूदा स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को UGC Equity Regulations 2026 के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। अदालत ने शुरुआती सुनवाई के दौरान कुछ प्रावधानों में अस्पष्टता और उनके संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई थी।
अदालत ने आदेश दिया था कि वर्ष 2026 के नियम अगले आदेश तक स्थगित रहेंगे और इस दौरान वर्ष 2012 के पुराने UGC Equity Regulations लागू रहेंगे। इसलिए नए नियम वर्तमान में प्रभावी नहीं हैं, लेकिन उन्हें स्थायी रूप से वापस भी नहीं लिया गया है।
20 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इन नियमों पर दोबारा विचार किया जा रहा है। इसी बीच अलग-अलग राज्यों में आंदोलनकारी नियमों को स्थायी रूप से वापस लेने की मांग कर रहे हैं। मेरठ में हुआ जल सत्याग्रह इसी विरोध की नई कड़ी है।
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